Mega Conference of Rural Development Wing at Shantivan in Abu Road

देश के विकास का रास्ता गांव की गलियों से होकर गुजरता है इसलिए देश को विकास के रास्ते पर आगे बढ़ाना है तो पहले गांव का विकास जरूरी है और गांव में विकास की नदी को बहाना है तो उसकी धारा को बहने के लिए सबसे पहले सही रास्ता बनाना होगा। हालांकि विकास की इसी प्रक्रिया में तमाम सरकारी योजनाओं का खाका तैयार किया गया है जिसके चलते गांव में चहुमुखी विकास की लहर दौड़ रही है लेकिन फिर भी लोगों में कहीं न कहीं जानकारी का अभाव है जिसकी भरपाई भी गांव के लोगों को खुद ही करनी पड़ती है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए ब्रह्माकुमारीज संस्थान के मुख्यालय राजस्थान आबू रोड के शांतिवन में ग्राम विकास प्रभाग द्वारा महासम्मेलन का आयोजन किया गया था।
राष्ट्रीय प्रगति का आधार सशक्त किसान-समृद्ध गांव नामक इस महासम्मेलन और राजयोग रिट्रीट का उद्घाटन केंद्रिय कृषि और किसान कल्याण मंत्री राधामोहन सिंह, संस्था प्रमुख राजयोगिनी दादी जानकी, ग्राम विकास प्रभाग की अध्यक्षा बीके सरला, उपाध्यक्ष बीके राजू, शांतिवन कार्यक्रम प्रबंधिका बीके मुन्नि समेत अनेक विद्वानों ने दीप जलाकर किया था।
पिछले कई वर्षो से गांवो को गोकुल गांव बनाने के लिए रासायनिक खादों का उपयोग कम तथा जैविक और यौगिक खेती को बढ़ावा देने का प्रयास अब कारगर साबित होता नजर आ रहा है। जिसकी एक झलक शांतिवन के डायमंड हाल में देखने को मिली, जब भारत सरकार के केंद्रिय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधामोहन सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि कुछ दशकों के दौरान हम खाद्यान्न के क्षेत्र में आत्म निर्भर हो गये हैं, यह हमारे देश के लोगो के लिए तथा किसानो के लिए गर्व की बात है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के कृषि सम्बंधित सपनों को पूरा करने में ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान मुख्य भूमिका निभा रही है
वहीं दादी जानकी और बीके निर्वैर समेत संस्थान के वरिष्ठ सदस्यों ने कहा कि हमारा प्रयास है कि हर किसान जैविक के साथ यौगिक खेती करें जिससे कम लागत में अच्छी उपज हो और लोगो के लिए भी लाभकारी हो, साथ ही किसानो से राजयोग द्वारा अपने अंदर की सामाजिक कुरीतियों को दूर करने का आह्वान भी किया।

इसके उद्घाटन सत्र में संस्थान के ग्राम विकास प्रभाग द्वारा गांव में किए जा रहे कार्यक्रमों की पूरी जानकरी दी गई व आए हुए अतिथियों का स्वागत करने के साथ ही उन्हें ईश्वरीय सौगात भेंटकर तथा शॉल ओढ़ाकर सम्मानित भी किया गया।

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